रूसी चर्च का इतिहास (1700–1917)

रूसी चर्च के इतिहासकार इगोर कोर्निल्येविच स्मोलिच का यह आधारभूत ग्रंथ उसके इतिहास के धर्मसभा-काल को समर्पित है — अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में पीटर प्रथम के सुधारों से लेकर 1917 में पैट्रियार्क-पद की पुनर्स्थापना तक। लेखक राजकीय चर्च-व्यवस्था के गठन, परम पवित्र धर्मसभा की संरचना और कार्यकलाप, चर्च और सम्राट की सत्ता के पारस्परिक संबंधों तथा धर्मप्रांतीय प्रशासन के विकास का विस्तृत अध्ययन करते हैं। पैरिश पादरी वर्ग की स्थिति, उसकी भौतिक और सामाजिक दशा, धार्मिक शिक्षा के संगठन तथा राजकीय और सामाजिक सुधारों के प्रभाव में चर्च-जीवन में आए परिवर्तनों पर विशेष ध्यान दिया गया है। स्मोलिच रूसी साम्राज्य के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के व्यापक संदर्भ में चर्च के इतिहास पर विचार करते हैं और धर्मसभा-युग की जटिलता एवं अंतर्विरोधों को उजागर करते हैं। पुस्तक व्यापक शोध-सामग्री, स्रोतों और ग्रंथसूची से सुसज्जित है तथा अठारहवीं से बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक के रूसी चर्च के इतिहास पर किए गए सर्वाधिक विस्तृत अध्ययनों में से एक है।

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